विकास के इस नए दौर में बहुत सी सुविधाएं हैं जो कि आम जन को प्राप्त हो रही हैं। जिसमें सड़क निर्माण का प्रचलन सबसे महत्वपूर्ण है। सड़क निर्माण किसी भी क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी और बहुत फायदेमंद रहती है। शहरों में प्रचलन के बाद अब गांव गांव सड़क निर्माण का प्रचलन काफी समय से चला आ रहा है। लेकिन जितनी सुविधाएं सड़क निर्माण के बाद पहाड़ों में रहने वाले लोगों को मिली हैं उतना ही नुकसान पहाड़ी क्षेत्रों को हुआ है।
यहां सड़क निर्माण के बाद सुविधाएं तो उपलब्ध हुई हैं पर साथ ही वनों का अंधाधुंध विनाश हो चुका है। पिछले 5 से 10 सालों के बीच उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 5 प्रतिशत वन क्षेत्र में कमी आई है। बड़े बड़े पहाड़ों और चट्टानों को काटने के बाद पहाड़ों पर सड़क निर्माण संभव हो पाता है। इसमें हजारों पेड़ों को काटना पड़ता है। किंतु इसके बाद भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का वर्चस्व बढ़ जाता है।
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जहां पहले हरे भरे पेड़ पैधों का नजारा दिखता था अब जगह जगह धसी हुई चट्टाने देखने को मिलती हैं। पहाड़ की शुद्ध हवा मन को भा जाती थी अब पेड़ों के अंधाधुंध कटान के बाद वो हवा बदल चुकी है। चारों ओर अब बस कटाई के मंजर से धूल मिट्टी ही दिखाई पड़ती है। पहाड़ों में सड़क सुविधाओं का होना अत्यधिक जरूरी है किंतु जंगलों के विनाश से ये संभव भी नहीं हो सकता। अगर ऐसा ही चलता रहा तो पहाड़ में सुविधाओं से ज्यादा प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं का विकास ज्यादा होगा।
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