उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियां जोरों शोरों से हैं। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शिक्षकों की रहने वाली है। अपने अपने क्षेत्र में शिक्षकों की ड्यूटी मतदान के दिन लगाई जाती है। ऐसे में सभी शिक्षकों की भूमिका आवश्यक रहती है। लेकिन वे शिक्षक भी चुनाव की ड्यूटी में तैनात रहते हैं जो की शारीरिक रूप से 60 से 70 प्रतिशत तक विकलांग हैं।
उन शिक्षकों को भी ड्यूटी पर लगाया जाना है जो बिना लाठी और बैसाखी के चल फिर नहीं पाते। इस प्रकार के शिक्षकों ने निर्वाचन आयोग से चुनाव से अपनी तैनाती हटाने की अपील भी की है। मैदानी क्षेत्रों में तो सड़कें घर घर हैं किंतु चिंता पहाड़ी इलाकों की है। पहाड़ी इलाकों में जहां अभी सड़क सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं वहां कई कई किलोमीटर पैदल चलकर ही स्कूल पहुंचा जाता है।
ये भी पढ़ें: शर्मनाक: 4 साल की मासूम को टॉफी का लालच देकर युवक ने किया दुष्कर्म
इतनी दूर जाने के लिए इन दिव्यांग शिक्षकों को मजबूरन ही सही लेकिन लाठी और बैसाखी के सहारे ड्यूटी पर तैनात होना है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि इतनी परेशानी के बावजूद क्या दिव्यांग शिक्षकों की ड्यूटी मतदान केन्द्र पर जरूरी है? चुनाव में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है ये तो साफ है किंतु 60 से 70 प्रतिशत तक शरीर से दिव्यांग शिक्षक कैसे ड्यूटी पर तैनात रहेंगे।
ये भी पढ़ें: 2022 के गणतंत्र दिवस के लिए उत्तराखंड की झांकी का आकर्षक रूप आया सामने